वाराणसी। भारत और भूटान के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक रिश्तों को और प्रगाढ़ करने की दिशा में एक नई पहल की जा रही है। पिंडरा तहसील के अजईपुर गांव में भूटानी बौद्ध मंदिर और अतिथि गृह (गेस्ट हाउस) का निर्माण कराया जाएगा। इस परियोजना के लिए सरकार की ओर से दो एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है, जिस पर निर्माण कार्य भूटान सरकार स्वयं कराएगी। इस कदम से न केवल भारत-भूटान संबंधों में मजबूती आएगी बल्कि पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खुलेंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूटान यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच इस परियोजना पर सहमति बनी थी। प्रधानमंत्री ने तब भूटान सरकार को भारत की ओर से मंदिर और अतिथि गृह के लिए जमीन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। उसी वादे के अनुरूप अब वाराणसी प्रशासन ने अजईपुर में जमीन आवंटित कर दी है।
भूटान सरकार इस जमीन पर पारंपरिक शैली में बौद्ध मंदिर का निर्माण कराएगी। इसके साथ ही बौद्ध अनुयायियों और पर्यटकों के ठहरने के लिए एक आधुनिक अतिथि गृह भी बनाया जाएगा। मंदिर निर्माण के बाद अजईपुर क्षेत्र धार्मिक पर्यटन का एक नया केंद्र बन सकता है, जिससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
भूटान सरकार ने वर्ष 2019 में भारत सरकार से सारनाथ में भूटानी बौद्ध मंदिर बनाने की इच्छा जताई थी। इस पर पर्यटन मंत्रालय ने प्रदेश के पर्यटन प्रमुख सचिव को जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। जिलाधिकारी के आदेश पर राजस्व विभाग की टीम ने सारनाथ में सरकारी भूमि तलाशने का प्रयास किया, लेकिन उपयुक्त जमीन न मिलने पर पिंडरा तहसील के अजईपुर गांव को इसके लिए चयनित किया गया।
सारनाथ में पहले से ही तिब्बत, श्रीलंका, चीन, जापान, कंबोडिया, म्यांमार, थाईलैंड और कोरिया के बौद्ध मंदिर मौजूद हैं। अब भूटान का यह मंदिर भी उस अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सर्किट का हिस्सा बनेगा, जिससे वाराणसी की वैश्विक धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान और अधिक मजबूत होगी।